नज़रिया
Monday, 20 July 2020
अंदर का शोर Nazm
वो मोहब्बत हम पे जतलाएँ नहीं तो ना सही
बिगड़ी हुयी बात सुलझाएँ नहीं तो ना सही
जो मिला मुझको ज़माने से है दोहराता हूँ मै
ख़ूबसूरत गर मेरी बातें नहीं तो ना सही
मुझ को आता ही नहीं बातें सजा के बोलना
मेरी दिलचस्प है मुलाक़ातें नहीं तो ना सही
दर्द ख़ुद बनते हैं ख़ुद अपनी दवा बनते हैं हम
मेरे हिससे में तेरी साँसें नहीं तो ना सही
मिलने को यूँ तो मिला करती हैं उनसे आँखें
मेरा हमदम मुझको पहचानें नहीं तो ना सही
मेरे ढलते आँसूओ में से मुकम्मल है जहाँ
मेरे हिससे आयी बरसातें नहीं तो ना सही
दिल में सूरत कब से उनकी घूमता हूँ मैं लेके
अपना चेहरा आप दिखलाएँ नहीं तो ना सही
लोग तो दुनिया में सब पा लेते कुछ खोये बिना
सब खो कर भी मिली सौग़ातें नहीं तो ना सही
आसमा इक मैं ज़मीं पर ही सजाए रहता हूँ
मेरे हिससे चाँदनी-रातें नहीं तो ना सही -नज़र
Saturday, 6 June 2020
बहाना (नज़्म)
ये सच का भी दोस्त है झूट का भी सगा है
कभी लगे के जैसे किसी की साज़िश है
और कभी एक बेमिसाल हुनर की नुमाइश है
मियाँ इतना आसां भी नहीं बहाने बनाना
जो कभी हुआ ही नहीं उस पे यक़ीं दिलाना
यह वो फ़न हैं जो बचपन से होता है नुमूदार
बनते बनते बनते आदमी बनता है मक्कार
यूँ देखा जाए तो झूठ से बेहतर है बहाना
पर सच में सच से कब कमतर है बहाना
बहाने बनाने के फायदे भी है
बहाने बनाने के क़ाएदे भी है
नाराज़गी में वो शिद्दत नहीं रहती
राज खुल भी जाए तो ज़िल्लत नहीं रहती
टूटते रिश्ते फिर से जुड़ जाते हैं
गिले शिकवे सब सिकुड़ जाते हैं
अब शाइस्ता मिज़ाजों को ही देख लीजिए
उनकी मोहब्बत पर भी ज़रा गौर कर लीजिए
जो रोज़ थे मिलते किसी ना किसी बहाने से
अब मिलने से पीछा है छुड़ाते एक नए बहाने से
मजाल की उनके मासूम इरादों पर अंदेशा हो जाए
और हम बिना किसी बात के उनसे खफा हो जाए
हमनें भी ठाना है अब सिर्फ़ बहाना बनना है
इस हुनर का दांव पेच हमें भी आज़माना है
रोज़-ए- क़यामत जब ख़ुदा लेगा गुनाहों का हिसाब
ना झूट बोलेंगे ना सच बोलेंगे बहाना कर देंगे उससे भी जनाब
- नज़र
Thursday, 21 May 2020
ये आँसू (नज़्म)
Wednesday, 13 May 2020
एक नया आदमी (नज़्म)
एक नया आदमी (नज़्म)
अपने लिए आप अपनी कहानी लिखना होगा
अपने अंदर का टूटा अपने आप समेटना होगा
आप ही अपने आप को समझना होगा
वक़्त रहते एक नया आदमी बनना होगा
ताउम्र लोग एक जैसे रहे तो रहे कैसे
कली गर चाहे तो कली बनी रहे तो रहे कैसे
खुद तो तुम बदलोगे ही
उसका भी मिजाज़ बदल जाएगा
सिर्फ तुम्हारा नहीं
उसकी मोहब्बत का भी अंदाज़ बदल जायगा
हमारा रिश्ता इसलिए नहीं टूटा की
ग़लत तुमने किया या हमने किया
सच तो ये है
ना तुमने कुछ किया ना हमनें कुछ किया
जिंदिगी को हमने कुछ इस तरह बसर कर दिया
सोचा तो किया नहीं
और जब किया बिना सोचे कर दिया
कभी हम माज़ी से लिपटे रहे
कभी माज़ी हमसे लिपटा रहा
पाँव तो थक के रुक गए थे
और एक सर है जो दीवार से टकराता रहा
एक हिचक है जो कुछ नहीं करने देती
और एक ख़्वाब है जो रातों को तड़पाता रहा
ज़ेहन घर है सिर्फ दो ख्यालों का
कुछ उम्रदराज़ों का कुछ नौजवानों का
पहला मुझे भींचे है
और दूजा मुझे खींचे है
दूजे की जानिब बढ़ना होगा
कुछ बिखरे हुए ख़्वाब, टूटे हुए आईने
फिर से जोड़ना होगा
वक़्त रहते एक नया आदमी बनना होगा
नज़र
अंदर का शोर Nazm
अंदर का शोर आजिज़ है जिस्म दिल पे इतना ज़ोर है धड़कन न समझ ये मेरे अंदर का शोर है ये शोर क्यों है क्या हक़ीक़त कहूँ मैं समझ ले ख्व...
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सोचो तो ये बहाने की अपनी एक अदा है ये सच का भी दोस्त है झूट का भी सगा है कभी लगे के जैसे किसी की साज़िश है और कभी एक बेमिसाल हुनर की न...
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अंदर का शोर आजिज़ है जिस्म दिल पे इतना ज़ोर है धड़कन न समझ ये मेरे अंदर का शोर है ये शोर क्यों है क्या हक़ीक़त कहूँ मैं समझ ले ख्व...
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