सोचो तो ये बहाने की अपनी एक अदा है
ये सच का भी दोस्त है झूट का भी सगा है
कभी लगे के जैसे किसी की साज़िश है
और कभी एक बेमिसाल हुनर की नुमाइश है
मियाँ इतना आसां भी नहीं बहाने बनाना
जो कभी हुआ ही नहीं उस पे यक़ीं दिलाना
यह वो फ़न हैं जो बचपन से होता है नुमूदार
बनते बनते बनते आदमी बनता है मक्कार
यूँ देखा जाए तो झूठ से बेहतर है बहाना
पर सच में सच से कब कमतर है बहाना
बहाने बनाने के फायदे भी है
बहाने बनाने के क़ाएदे भी है
नाराज़गी में वो शिद्दत नहीं रहती
राज खुल भी जाए तो ज़िल्लत नहीं रहती
टूटते रिश्ते फिर से जुड़ जाते हैं
गिले शिकवे सब सिकुड़ जाते हैं
अब शाइस्ता मिज़ाजों को ही देख लीजिए
उनकी मोहब्बत पर भी ज़रा गौर कर लीजिए
जो रोज़ थे मिलते किसी ना किसी बहाने से
अब मिलने से पीछा है छुड़ाते एक नए बहाने से
मजाल की उनके मासूम इरादों पर अंदेशा हो जाए
और हम बिना किसी बात के उनसे खफा हो जाए
हमनें भी ठाना है अब सिर्फ़ बहाना बनना है
इस हुनर का दांव पेच हमें भी आज़माना है
रोज़-ए- क़यामत जब ख़ुदा लेगा गुनाहों का हिसाब
ना झूट बोलेंगे ना सच बोलेंगे बहाना कर देंगे उससे भी जनाब
- नज़र
ये सच का भी दोस्त है झूट का भी सगा है
कभी लगे के जैसे किसी की साज़िश है
और कभी एक बेमिसाल हुनर की नुमाइश है
मियाँ इतना आसां भी नहीं बहाने बनाना
जो कभी हुआ ही नहीं उस पे यक़ीं दिलाना
यह वो फ़न हैं जो बचपन से होता है नुमूदार
बनते बनते बनते आदमी बनता है मक्कार
यूँ देखा जाए तो झूठ से बेहतर है बहाना
पर सच में सच से कब कमतर है बहाना
बहाने बनाने के फायदे भी है
बहाने बनाने के क़ाएदे भी है
नाराज़गी में वो शिद्दत नहीं रहती
राज खुल भी जाए तो ज़िल्लत नहीं रहती
टूटते रिश्ते फिर से जुड़ जाते हैं
गिले शिकवे सब सिकुड़ जाते हैं
अब शाइस्ता मिज़ाजों को ही देख लीजिए
उनकी मोहब्बत पर भी ज़रा गौर कर लीजिए
जो रोज़ थे मिलते किसी ना किसी बहाने से
अब मिलने से पीछा है छुड़ाते एक नए बहाने से
मजाल की उनके मासूम इरादों पर अंदेशा हो जाए
और हम बिना किसी बात के उनसे खफा हो जाए
हमनें भी ठाना है अब सिर्फ़ बहाना बनना है
इस हुनर का दांव पेच हमें भी आज़माना है
रोज़-ए- क़यामत जब ख़ुदा लेगा गुनाहों का हिसाब
ना झूट बोलेंगे ना सच बोलेंगे बहाना कर देंगे उससे भी जनाब
- नज़र